इंसान से हैं इंसान का नाता अजीब,
नहीं जाता अब वो इंसान के करीब,
जिंदगी की जधुजेहत में गुज़र जाता है वक़्त,
मायने नहीं रखता अब कोई रक्त,
कबसे बाहे फेलाए जिंदगी पुकारे,
आ देख प्यार के हसीं नज़ारे,
कहीं तो मिलते होंगे,
इंसान से इंसान हमारे...
धरती और गगन साथ चलते रहे,
दूरीयो की तुलना से जुढ़ते रहे,
स्पर्श एक का न महसूस किया दूजे ने,
पर रह न पाए दूर कभी एक दूजे से,
धरती चली कर कदम पे साथ,
कभी नदी, कभी पहाढ़, कभी बन के रेगिस्तान,
कहीं तो मिलते होंगे,
यह ज़मीन और आसमान...
ख्वाबो के परो ने सिखाया उड़ना हमें,
वास्तविकता ने वापिस जगाया हमें,
सच करने के जोश ने आगे बढाया हमें,
टूटे हुए सपनो ने कुछ तो सिखाया हमें,
बचपन में जिन्होंने झूलाया हमें,
उसी जिंदगी ने जवानी में झिंझोड़ा हमें,
कहीं तो मिलते होंगे,
यह ख्वाब और हकीकत के हसीं लम्हे...
जब से होश संभाला देखा साथ एक प्यार का,
किया इंतज़ार उस एहसास का,
नाज़ो से पाले, पलकों पे सजे,
मोहब्बत ही मोहब्बत, दुआ ये ही, हर कदम पे मिले,
जीं जान वारने को मन किया,
समुन्दर की गहराई तक इश्क करने को मन किया,
कहीं तो मिलते होंगे,
परियों को ऐसे राजकुमार,
दिल ने धड़कने का वादा सिर्फ इसी शर्त पे किया...
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